तोरि मानिनी तें हियो, फोरि मोहिनी मान ।
प्रेम देव की छविहि लखि, भए मियाँ रसखान ॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (50)
कृष्ण-भक्ति की ओर अपना रुझान प्रकट करते हुए रसखान कहते हैं कि मान करने वाली नारी से हृदय को तोड़कर (अर्थात् उसके प्रेम-बंधनों को छोड़कर) और इस मोहिनी माया के गर्व को नष्ट करके, प्रेम के देवता श्रीकृष्णचन्द्र की शोभा को देखकर मुसलमान धर्मावलम्बी भी अब रसखान (रस की खान) बन गया।
प्रेम देव की छविहि लखि, भए मियाँ रसखान ॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (50)
कृष्ण-भक्ति की ओर अपना रुझान प्रकट करते हुए रसखान कहते हैं कि मान करने वाली नारी से हृदय को तोड़कर (अर्थात् उसके प्रेम-बंधनों को छोड़कर) और इस मोहिनी माया के गर्व को नष्ट करके, प्रेम के देवता श्रीकृष्णचन्द्र की शोभा को देखकर मुसलमान धर्मावलम्बी भी अब रसखान (रस की खान) बन गया।

