(कवित्त)
गहवर - विपिन की लतिका निहार नीकी,
सन्तन तें पाउँ पथ प्रेम सरसाने कौ। [1]
झाँकी मान-मन्दिर मानस में धारि देखौं,
मोरकुटी-मंजु-थल दुख के नसाने कौ॥ [2]
कवि 'जयदेव' खिन बैठि खोर साँकरी में,
ध्यान धरौं प्यारे चितचोर सुखसाने कौ। [3]
एक यह आस वृषभानुजा ! तिहारे पास,
ह्वै कैं खास दास बास लहौं बरसाने कौ॥ [4]
- श्री जयदेव जी
श्री बरसाने में स्थित गह्वर वन की सुंदर लताओं को निहार कर आनंद प्राप्त होता है। उन संतों पर बलिहारी जाता हूँ जिन्होंने प्रेम का पंथ दिखाया है। [1]
सुंदर मान मंदिर की झांकी को मानस में धारण कर देखो कैसे मंजुल स्थल मोरकुटी समस्त दुखों का नाश करने वाली है। [2]
श्री जयदेव कवि साँकरी खोर में बैठ कर सुखसिन्धु, चित्त को चुराने वाले प्यारे कृष्ण का ध्यान करते हैं। [3]
मेरी तो यही एक आशा वृषभानु दुलारी श्री राधा से है कि मैं उनका ख़ास दास होकर बरसाने का वास प्राप्त करूँ। [4]
गहवर - विपिन की लतिका निहार नीकी,
सन्तन तें पाउँ पथ प्रेम सरसाने कौ। [1]
झाँकी मान-मन्दिर मानस में धारि देखौं,
मोरकुटी-मंजु-थल दुख के नसाने कौ॥ [2]
कवि 'जयदेव' खिन बैठि खोर साँकरी में,
ध्यान धरौं प्यारे चितचोर सुखसाने कौ। [3]
एक यह आस वृषभानुजा ! तिहारे पास,
ह्वै कैं खास दास बास लहौं बरसाने कौ॥ [4]
- श्री जयदेव जी
श्री बरसाने में स्थित गह्वर वन की सुंदर लताओं को निहार कर आनंद प्राप्त होता है। उन संतों पर बलिहारी जाता हूँ जिन्होंने प्रेम का पंथ दिखाया है। [1]
सुंदर मान मंदिर की झांकी को मानस में धारण कर देखो कैसे मंजुल स्थल मोरकुटी समस्त दुखों का नाश करने वाली है। [2]
श्री जयदेव कवि साँकरी खोर में बैठ कर सुखसिन्धु, चित्त को चुराने वाले प्यारे कृष्ण का ध्यान करते हैं। [3]
मेरी तो यही एक आशा वृषभानु दुलारी श्री राधा से है कि मैं उनका ख़ास दास होकर बरसाने का वास प्राप्त करूँ। [4]

