मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारी -  श्री विहारीवल्लभ जी की वाणी

मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारी - श्री विहारीवल्लभ जी की वाणी

(राग विलावल)
मेरी प्यारी रंग रंगीली सुकुमारी ।
सब सुख सागर रूप उजागर, नागर रसिक-बिहारी ॥ [1]
तेरे रंग रहत निसिवासर, जीवन प्राण अधारी ।
रसिक रसीलो छैल छबीलो, आनंद की निधि भारी ॥ [2]
भगवत रसिक लड़ावत छिन छिन, गावत सुजस निहारी ।
जीवन जुगल ‘बिहारीवल्लभ’ तृन तोरत बलिहारी ॥ [3]

- श्री विहारीवल्लभ, श्री विहारीवल्लभ जी की वाणी

मेरी प्यारी श्री राधिका रंग रंगीली एवं सुकुमारी हैं । मेरे बिहारीजी सभी सुखों के धाम हैं, जो रूप से उज्ज्वल हैं और रसिक चूड़ामणि हैं । [1]

श्री राधा के रंग में सदा बिहारीजी रहते हैं जो उनके प्राणों की आधार हैं । श्री बिहारीजी रसिक रसीले हैं, सुंदर छवि वाले हैं एवं आनंद के अपार निधि हैं । [2]

श्री भागवत रसिक सदा दिव्य युगल को लाड़ लड़ाते हैं, उनका यशोगान करते हैं और उन्हें निहारते रहते हैं । श्री भागवत रसिक की कृपा से श्री विहारिवल्लभ जी भी युगल सरकार पर बलिहारी जाते हैं जो उन्हें प्राणों के समान प्रिय हैं । [3]