मैं तौ तोही कौं सिर नायौ - श्री भोरी सखी

मैं तौ तोही कौं सिर नायौ - श्री भोरी सखी

मैं तौ तोही कौं सिर नायौ ।
रोम-रोम अपराधी तौहूँ तेरेई हाथ बिकायौ ॥ [1]
अपनी ओर निहारि कृपा करि तुमहीं ने अपनायौ ।
सुनौं किशोरी ‘भोरी’ स्वामिनि अब कैसैं बिसरायौ ॥ [2]

- श्री भोरी सखी

केवल आप ही हैं जिनके चरण कमलों में मैं पूर्ण रूप से समर्पित हूँ । यद्यपि मैं रोम-रोम से पापी हूँ, फिर भी मैं आपके हाथों बिक चुका हूँ । [1]

आपने ही मुझे अपनाया है कृपा कर अपनी ओर निहार (आप कृपा की सागर हैं) मुझ पर कृपा कीजिए । मेरी भोरी किशोरी जी [राधा], अब आप मुझे क्यों भूल गईं? [2]