तस्मात्सर्वप्रयत्नेन मत्प्रियां शरणं व्रजेत् - पद्म पुराण, पाताल खंड (82.86)

तस्मात्सर्वप्रयत्नेन मत्प्रियां शरणं व्रजेत् - पद्म पुराण, पाताल खंड (82.86)

तस्मात्सर्वप्रयत्नेन मत्प्रियां शरणं व्रजेत् । आश्रित्य मत्प्रियां रुद्र मां वशीकर्त्तुमर्हसि ॥
इदं रहस्यं परमं मया ते परिकीर्तितम् । त्वयाप्येतन्महादेव गोपनीयं प्रयत्नतः ॥

- पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 82, छंद (86, 87)

भगवान श्री कृष्ण श्री शिवजी से कहते हैं - हे रुद्र, यदि मुझे वश में करना चाहते हो तो मेरी प्रियतमा (श्री राधा) का आश्रय ग्रहण करो । मैंने आपसे यह परम रहस्य की बात कही है आप इसे गुप्त ही रखियेगा ।