अहो कृष्ण! करुणा करौ, प्रबल बढ़यौ कलिकाल ।
वृंदावन हित उर व्यथा, हरौ नंद के लाल ॥
- श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (87)
अहो कृष्ण! कलियुग का प्रभाव अत्यंत प्रबल हो उठा है। कृपा कर मेरे हृदय की व्यथा हर लीजिए और अपनी करुणा से मुझे संरक्षण प्रदान कीजिए।
वृंदावन हित उर व्यथा, हरौ नंद के लाल ॥
- श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (87)
अहो कृष्ण! कलियुग का प्रभाव अत्यंत प्रबल हो उठा है। कृपा कर मेरे हृदय की व्यथा हर लीजिए और अपनी करुणा से मुझे संरक्षण प्रदान कीजिए।

