(दोहा)
पलकांतर अवलोक बिन, कल्पांतरहि विहात।
सरबस धन बिनु स्वामिनी, और न कछू सुहात॥
(पद)
मेरें सरबस-धन स्वामिनी मोहिं और न कछू सुहावै री।
पलकांतर अवलोके बिन मोहि कल्पांतरहि बिहावै री॥ [1]
एक टेक यहि चित चढ़ी रहै बिन देखे अकुलावैं री।
श्रीहरिप्रिया प्रान धन जीवन जोइ जु मोहिं जिवावैं री॥ [2]
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (33)
(श्री कृष्ण के वचन)
(दोहा)
मेरी सर्व-सुधन श्री स्वामिनी जू ही हैं, इनके बिना मुझे और कुछ नहीं सुहाता है। इनके दर्शन करते-करते जब मेरी पलक गिर जाती है, तो वह क्षण-काल का समय मुझे इतना बड़ा प्रतीत होता है, मानो अनंत कल्प इनके दर्शन बिना व्यतीत हो गए हों।
(पद)
मेरी तो एक मात्र सर्व सुधन स्वरूपा श्रीस्वामिनीज़ू ही हैं। मुझे इनके अतिरिक्त और कुछ अच्छा नहीं लगता है। मेरी पलक गिरने से जब इनके दर्शन का व्यवधान होता है तो वह क्षण काल भी इतना बड़ा लगता है मानो इनके दर्शन बिन कई कल्प व्यतीत हो गये हों। [1]
मेरे चित्त में यहीं एक टेक सदा चढ़ी रहती है कि इनके दर्शन बिना मेरे प्राण अकुला उठते हैं। हे श्रीहरि प्रिया सखी ! श्री लड़ैती जू मेरे प्राण जीवन धन स्वरूपा है, यही मुझको अपनी कृपा भरी दृष्टि से देख देख कर जिवाती रहती हैं। [2]
पलकांतर अवलोक बिन, कल्पांतरहि विहात।
सरबस धन बिनु स्वामिनी, और न कछू सुहात॥
(पद)
मेरें सरबस-धन स्वामिनी मोहिं और न कछू सुहावै री।
पलकांतर अवलोके बिन मोहि कल्पांतरहि बिहावै री॥ [1]
एक टेक यहि चित चढ़ी रहै बिन देखे अकुलावैं री।
श्रीहरिप्रिया प्रान धन जीवन जोइ जु मोहिं जिवावैं री॥ [2]
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (33)
(श्री कृष्ण के वचन)
(दोहा)
मेरी सर्व-सुधन श्री स्वामिनी जू ही हैं, इनके बिना मुझे और कुछ नहीं सुहाता है। इनके दर्शन करते-करते जब मेरी पलक गिर जाती है, तो वह क्षण-काल का समय मुझे इतना बड़ा प्रतीत होता है, मानो अनंत कल्प इनके दर्शन बिना व्यतीत हो गए हों।
(पद)
मेरी तो एक मात्र सर्व सुधन स्वरूपा श्रीस्वामिनीज़ू ही हैं। मुझे इनके अतिरिक्त और कुछ अच्छा नहीं लगता है। मेरी पलक गिरने से जब इनके दर्शन का व्यवधान होता है तो वह क्षण काल भी इतना बड़ा लगता है मानो इनके दर्शन बिन कई कल्प व्यतीत हो गये हों। [1]
मेरे चित्त में यहीं एक टेक सदा चढ़ी रहती है कि इनके दर्शन बिना मेरे प्राण अकुला उठते हैं। हे श्रीहरि प्रिया सखी ! श्री लड़ैती जू मेरे प्राण जीवन धन स्वरूपा है, यही मुझको अपनी कृपा भरी दृष्टि से देख देख कर जिवाती रहती हैं। [2]

