(राग भैरव)
श्री राधेजू कौ श्रीवृंदावन वनराजु ।
रतन जटित भूमंडल शोभित, कनक वल्लरी साजु ॥ [1]
अष्ट सिद्धि नवनिधि बुहारह, बीथिनु रोपि समाजु ।
श्री रामराय प्यारे रखवारी, हिय हितु पोखन काजु ॥ [2]
- श्री रामराय जी, आदिवाणी (3)
श्री वृंदावन वनराज श्री राधा जू का है जहाँ की भूमि रत्नों से जटित एवं लताएं सोने के समान सजी हैं । [1]
जहां की रज में अष्ट सिद्धियां एवं नौ प्रकार की निधियां झाड़ू लगाती हैं और जहां की कुंज लताओं के भीतर प्रिया प्रियतम का सुंदर समाज होता है । श्री रामराय जी कहते हैं कि इस वृंदावन की स्वामिनी श्री राधा महारानी सब प्रकार से रक्षा करने वाली हैं जो ह्रदय की समस्त अभिलाषों को पूर्ण करती हैं । [2]
श्री राधेजू कौ श्रीवृंदावन वनराजु ।
रतन जटित भूमंडल शोभित, कनक वल्लरी साजु ॥ [1]
अष्ट सिद्धि नवनिधि बुहारह, बीथिनु रोपि समाजु ।
श्री रामराय प्यारे रखवारी, हिय हितु पोखन काजु ॥ [2]
- श्री रामराय जी, आदिवाणी (3)
श्री वृंदावन वनराज श्री राधा जू का है जहाँ की भूमि रत्नों से जटित एवं लताएं सोने के समान सजी हैं । [1]
जहां की रज में अष्ट सिद्धियां एवं नौ प्रकार की निधियां झाड़ू लगाती हैं और जहां की कुंज लताओं के भीतर प्रिया प्रियतम का सुंदर समाज होता है । श्री रामराय जी कहते हैं कि इस वृंदावन की स्वामिनी श्री राधा महारानी सब प्रकार से रक्षा करने वाली हैं जो ह्रदय की समस्त अभिलाषों को पूर्ण करती हैं । [2]

