अपनैं-अपनैं मत लगे - श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (710)

अपनैं-अपनैं मत लगे - श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (710)

अपनैं-अपनैं मत लगे, बादि मचावत सोरु ।
ज्यौं-त्यौं सबकौं सेइबौ, एकै नन्दकिसोरु ॥

- श्रीमहाकवी बिहारी लाल, बिहारी सतसई (710)

अपने-अपने मत के लिए व्यर्थ ही लोग हल्ला मचा रहे हैं। अंततः सभी को उस एक भगवान श्रीकृष्ण की ही उपासना करनी है, चाहे वे उन्हें किसी भी नाम से पुकारें।