श्यामा श्याम दोउ रंग भीनैं - श्री रूप रसिक देवाचार्य, नित्य विहार पदावली (33)

श्यामा श्याम दोउ रंग भीनैं - श्री रूप रसिक देवाचार्य, नित्य विहार पदावली (33)

(राग सारंग)
श्यामा श्याम दोउ रंग भीनैं।
ठाढ़े कुंज कदम की छहियां, गर वर बंहियाँ दीनैं ॥ [1]
वह वंसी वह मुख मनु कोकिल, ताल तान मिली गावैं । 
वृंदावन फूल्यौ फल फलियौ, सारंग राग सुहावैं ॥ [2]
तरु पंछी मृग नीर वेलि गिर थकित भये सुनि ताही ।
जुगल- किशोर जोर छवि ऊपर, 'रूपरसिक' वलि जावैं ॥ [3]

- श्री रूप रसिक देवाचार्य, नित्य विहार पदावली (33)

श्यामा श्याम दोनों प्रेम के रंग में भींज कर निकुंज में कदंब के वृक्ष के नीचे एक दूसरे के गले में बाँहें डाले खड़े हैं । [1]

श्री वृंदावन धाम में चारों ओर  हरियाली छायी हुई है, फूल खिले हुए हैं एवं फल फलित हो रहे हैं वहाँ श्री राधिका, कोयल के समान मुख से राग सारंग में गान कर रही हैं और श्री कृष्ण उनसे ताल बंधा कर मुरली बजा रहे हैं । [2]

जिसको सुनकर वृक्ष, पक्षी, मृग, नीर, बेली, पर्वत आदि शिथिल हो रहे हैं ।  श्री रूपरसिक देवाचार्य कहते हैं कि श्री युगल किशोर की नवयौवन की उल्लसित अवस्था की छवि को देखकर वे बलिहारी जा रहे हैं । [3]