नारायण या डगर में, कोउ चलत है बीर ।
पग पग में बरछी लगै, श्वास श्वास में तीर ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (138)
प्रभु के प्रेम-पथ पर चलने वाला कोई विरला साहसी ही होता है, क्योंकि इस मार्ग में प्रत्येक कदम पर मानो बरछी चुभती है और प्रत्येक श्वास में तीर सा वेधन अनुभव होता है।
पग पग में बरछी लगै, श्वास श्वास में तीर ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (138)
प्रभु के प्रेम-पथ पर चलने वाला कोई विरला साहसी ही होता है, क्योंकि इस मार्ग में प्रत्येक कदम पर मानो बरछी चुभती है और प्रत्येक श्वास में तीर सा वेधन अनुभव होता है।

