किये व्रतदान तीरथ सनान - ब्रज के सवैया

किये व्रतदान तीरथ सनान - ब्रज के सवैया

किये व्रतदान तीरथ सनान, बहु धारिकै ध्यान, खूब आसन लगायौ।
करिकै भलाई अति की ही कमाई, छैकैं सुखदाई निजनाम कमायौ॥ [1]
संपति अपार भव-सागर के माँहि, यार हुसियार व्रत जग जस छायौ।
दीनबन्धु सब धन्ध वृथा ही तेरे, जो कि बांकेबिहारी सौ नेह न लायौ॥ [2]

- ब्रज के सवैया

चाहे अनंत बार व्रत कर डालो, दान कर डालो, तीर्थों में जा-जा कर स्नान कर डालो, खूब आसन लगाकर ध्यान कर डालो। चाहे दान-भलाई आदि की कमाई कर स्वयं का निज नाम कमा डालो। [1]

इस भवसागर में चाहे अपार संपत्ति का संग्रह कर डालो अथवा सावधानीपूर्वक व्रत आदि का पालन कर प्रसिद्धि बना लो। ऐसा सब कुछ करने पर भी यह सब व्यर्थ के द्वंद्व ही हैं यदि श्री बाँके बिहारी जू से प्रेम न बढ़ाया। [2]