हरिभक्ति सुरस सिन्धो - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (11.35)

हरिभक्ति सुरस सिन्धो - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (11.35)

हरिभक्ति सुरस सिन्धो मन्थदिव मन्थादिव सारमुत्थतं किमपि।
आश्रय परमोदारं सकलासारं विहाय राधिकारामम् ॥

- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (11.35)

हरि भक्ति के सुरस सिन्धु मंथन से यह अनिर्वचनीय सार रूप श्रीवृन्दावन प्रकट हुआ है, समस्त असार वस्तुओं को त्याग कर परम उदार श्रीराधिका- उपवन (इस श्रीवृन्दावन) का आश्रय कर ।