देखो री यह नन्द का छोरा बरछी मारे जाता है - श्री ललित किशोरी

देखो री यह नन्द का छोरा बरछी मारे जाता है - श्री ललित किशोरी

देखो री यह नन्द का छोरा बरछी मारे जाता है ।
बरछी सी तिरछी चितवन की पैनी छुरी चलाता है ॥ [1]
हमको घायल देख बेदरदी मन्द मन्द मुस्काता है ।
‘ललित किशोरी' जख्म जिगर पर नोनपुरी बुरकाता है ॥ [2]

- श्री ललित किशोरी
 
इस नंद के लाल (श्री कृष्ण) को तो देखो यह अपनी बरछी के समान तिरछी नज़रों से नुकीली छुरी हमारे ह्रदय को घायल करता है । [1]

पहले तो हमको उस छुरी से घायल करता है पुन: मंद मंद मुस्कुरा कर उस जिगर के जख्मों पर नमक भी छिड़कता है । [2]