रतन खचित भुव जगमगति, लसति तमालनि बेलि ।
श्री स्वामी हरिदास कै, निभृत निकुंजन केलि ॥
- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (43)
ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी के आराध्य श्री बिहारी-बिहारिणी जू श्री वृंदावन के निभृत निकुंजों में तमाल और बेलि के समान आलिंगनबद्ध होकर अनवरत केलि करते हैं, जहाँ की भूमि जगमगाते रत्नों से जटित है।
श्री स्वामी हरिदास कै, निभृत निकुंजन केलि ॥
- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (43)
ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी के आराध्य श्री बिहारी-बिहारिणी जू श्री वृंदावन के निभृत निकुंजों में तमाल और बेलि के समान आलिंगनबद्ध होकर अनवरत केलि करते हैं, जहाँ की भूमि जगमगाते रत्नों से जटित है।

