रतन खचित भुव जगमगति - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (91)

रतन खचित भुव जगमगति - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (91)

रतन खचित भुव जगमगति, लसति तमालनि बेलि ।
श्री स्वामी हरिदास कै, निभृत निकुंजन केलि ॥

- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (43)

ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी के आराध्य श्री बिहारी-बिहारिणी जू श्री वृंदावन के निभृत निकुंजों में तमाल और बेलि के समान आलिंगनबद्ध होकर अनवरत केलि करते हैं, जहाँ की भूमि जगमगाते रत्नों से जटित है।