कृपा करैं श्री हरि प्रिया, मिलै सार को सार ।
श्री राधा पद प्रीति रस, पावै नित्य विहार ॥
- श्री अली माधुरी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा रस सिद्धांत (4)
जब श्री हरिप्रिया श्री राधा कृपा करती हैं, तब वे अपने चरणों का अनुराग-रस प्रदान करती हैं। उसी कृपा से जीव को नित्य-विहार रूपी परम सार का भी सार रस सुलभ हो जाता है।
श्री राधा पद प्रीति रस, पावै नित्य विहार ॥
- श्री अली माधुरी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा रस सिद्धांत (4)
जब श्री हरिप्रिया श्री राधा कृपा करती हैं, तब वे अपने चरणों का अनुराग-रस प्रदान करती हैं। उसी कृपा से जीव को नित्य-विहार रूपी परम सार का भी सार रस सुलभ हो जाता है।

