राधा नाम रटे जोई, तासों मेरो संग ।
राधा ही के चरन में, मेरो रंग अभंग ॥
- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (31)
जो नित्य राधा-नाम को रटते हैं, उन्हीं के साथ मेरा सच्चा संग है। मेरी अविचल रति और अनन्य प्रीति केवल श्री राधा के चरणों में ही स्थित है।
राधा ही के चरन में, मेरो रंग अभंग ॥
- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (31)
जो नित्य राधा-नाम को रटते हैं, उन्हीं के साथ मेरा सच्चा संग है। मेरी अविचल रति और अनन्य प्रीति केवल श्री राधा के चरणों में ही स्थित है।

