तलहटी गोवर्धन की रहिये - गोस्वामी श्री हरिराय जी

तलहटी गोवर्धन की रहिये - गोस्वामी श्री हरिराय जी

(राग ईमन)
तरहटी गोवर्धन की रहिये ।
नित उठ मदन गोपाल लाल के, चरण कमल चित लहिये ॥ [1]
तन पुलकित ब्रज रज में लोटत, गोविन्द कुंड में न्हैये ।
‘रसिक प्रीतम’ हित चित की बतियाँ गिरधारी सों कहिये ॥ [2]

- गोस्वामी श्री हरिराय जी

श्री गोवर्धन की तलहटी में निवास करना चाहिए जहां नित्य प्रति उठ कर श्री मदन गोपाल लाल [श्री कृष्ण] के चरणों में ही चित्त को लगाना चाहिए । [1]

तन से रोमांचित होकर ब्रज की रज में लोटना चाहिए और गोविंद कुंड में नहाना चाहिए । श्री हरिराय जी कहते हैं कि प्रेम रस की बातें गिरिधर लाल से ही करनी चाहिए । [2]