प्रेम वारूनी छानि कै, बरुन भरा जलधीस ।
प्रेमहिं तें विष-पान करि, पूजे जात गिरीस ॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (4)
प्रेम की महिमा का गान करते हुए रसखान कहते हैं कि प्रेम-मदिरा छानने के कारण वरुण देव जलाधिपति बने, और प्रेमवश विष का पान करने से ही शिव पूजनीय हुए। प्रेम ही सब महिमा का मूल है।
प्रेमहिं तें विष-पान करि, पूजे जात गिरीस ॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (4)
प्रेम की महिमा का गान करते हुए रसखान कहते हैं कि प्रेम-मदिरा छानने के कारण वरुण देव जलाधिपति बने, और प्रेमवश विष का पान करने से ही शिव पूजनीय हुए। प्रेम ही सब महिमा का मूल है।

