भज मन राधिका के चरण - श्री शीतलदास जी

भज मन राधिका के चरण - श्री शीतलदास जी

भज मन राधिका के चरण ।
जाहि सुमिरे वेग छुटत, भव को आवागमन ॥ [1]
जोहि सर्वाभीष्ट दायक, सुख कारण दुख हरण ।
भक्त पालक दुष्ट हालक, पतितन के उद्धारण ॥  [2]
रसिक शेखर नंदनंदन, तिनके मन हरण ।
यही निश्चय जान 'शीतल', करत है अस्मरण ॥ [3]


- श्री शीतल दास जी

हे मन, श्री राधिका के चरणकमलों की भक्ति कर, जिनका स्मरण करने से 84 लाख योनियों के भवसागर का आवागमन जल्द ही समाप्त हो जाता है । [1]

श्री राधिका के चरण कमल सभी अभिलाषों को पूर्ण करने वाले, आनंद प्रदान करने वाले एवं दुखों का हरण करने वाले हैं। वे भक्तों के पालक, दुष्टों को दंड एवं पतितों के उद्धार करता हैं । [2]

श्री राधिका के चरण कमल रसिक शेखर श्री कृष्ण के मन को मोहने वाले हैं । श्री शीतल दास जी जी कहते हैं कि ऐसा निश्चय करके, उन चरणकमलों में अटूट विश्वास कर वे उन चरणों का नित्य निरन्तर स्मरण करते हैं। [3]