राधा-वल्लभ ध्याइ कैं और ध्याइयै कौंन - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (4)

राधा-वल्लभ ध्याइ कैं और ध्याइयै कौंन - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (4)

राधा-वल्लभ ध्याइ कैं, और ध्याइयै कौंन ।
व्यासहि देत बनै नहीं, बरी बरी प्रति लौंन ॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (4)

सब अवतारों के मूल श्री राधावल्लभ जी का ध्यान करने के बाद अब अन्य किसका ध्यान किया जाए? जैसे भोजन में एक साथ नमक डालते हैं, वैसे ही एक-एक 'बरी' (दाल की पकौड़ी) पर नमक डालने का कष्ट कौन करे? अर्थात् श्री राधावल्लभ का ही अनन्य भजन करना चाहिए।