उत्कंठा अति ही बढ़ी, तुव दरसन के काज ।
दया दृष्टि मो तन करो, श्री राधे सिरताज ॥
- श्री किशोरी अलि
हे सर्वोपरि स्वामिनी श्री राधे! आपके दर्शन की उत्कट लालसा मेरे हृदय में प्रबल हो उठी है। अपनी करुणामयी दया-दृष्टि मुझ पर डालकर मुझे कृतार्थ करें।
दया दृष्टि मो तन करो, श्री राधे सिरताज ॥
- श्री किशोरी अलि
हे सर्वोपरि स्वामिनी श्री राधे! आपके दर्शन की उत्कट लालसा मेरे हृदय में प्रबल हो उठी है। अपनी करुणामयी दया-दृष्टि मुझ पर डालकर मुझे कृतार्थ करें।

