(राग सारंग)
फूल महल में बैठे माधो संग वृषभान दुलारी ।
फूलन के हार सिंगार सब फूलन के फूल मुकुट सिरधारी ॥ [1]
फूल सिंहासन फूल गेंदुबा फूलन वनी है तिवारी।
फूले गावत वेनु बजावत राग रंग रस भारी ॥ [2]
फूले मधुप कोकिला कूँजत फूले पवन सुखकारी ।
श्री बिट्ठल गिरधर को निरखत अखियाँ टरत न टारी ॥ [3]
- श्री विट्ठल दास
श्री वृषभानुजी नंदिनी श्री राधा जू एवं माधव श्री कृष्ण फूलों के महल में विराजमान हैं । दोनों ने फूलों के ही हार डाले हैं एवं फूलों से ही संपूर्ण श्रृंगार किया है, एवं फूलों के ही बने मुकुट पहने हुए हैं । [1]
फूलों का ही सिंहासन है, फूलों का ही गोल तकिया है और फूलों के ही कुंज महल के तीनों द्वार हैं । प्रिया प्रियतम फूले फूले (आनन्दित) राग सारंग में गान कर रहे हैं एवं मधुर वेणु वादन कर रस बरसा रहे हैं । [2]
भंवरे गुंजार कर रहे हैं एवं कोयल मधुर स्वर में गा रही है, और सुखकारी पवन बह रही है । श्री विट्ठलनाथ जी कहते हैं कि श्री गिरिधल लाल को देख कर वे इतने मंत्रमुग्ध हैं कि वे अपनी दृष्टि को उनसे हटा नहीं पा रहे । [3]
फूल महल में बैठे माधो संग वृषभान दुलारी ।
फूलन के हार सिंगार सब फूलन के फूल मुकुट सिरधारी ॥ [1]
फूल सिंहासन फूल गेंदुबा फूलन वनी है तिवारी।
फूले गावत वेनु बजावत राग रंग रस भारी ॥ [2]
फूले मधुप कोकिला कूँजत फूले पवन सुखकारी ।
श्री बिट्ठल गिरधर को निरखत अखियाँ टरत न टारी ॥ [3]
- श्री विट्ठल दास
श्री वृषभानुजी नंदिनी श्री राधा जू एवं माधव श्री कृष्ण फूलों के महल में विराजमान हैं । दोनों ने फूलों के ही हार डाले हैं एवं फूलों से ही संपूर्ण श्रृंगार किया है, एवं फूलों के ही बने मुकुट पहने हुए हैं । [1]
फूलों का ही सिंहासन है, फूलों का ही गोल तकिया है और फूलों के ही कुंज महल के तीनों द्वार हैं । प्रिया प्रियतम फूले फूले (आनन्दित) राग सारंग में गान कर रहे हैं एवं मधुर वेणु वादन कर रस बरसा रहे हैं । [2]
भंवरे गुंजार कर रहे हैं एवं कोयल मधुर स्वर में गा रही है, और सुखकारी पवन बह रही है । श्री विट्ठलनाथ जी कहते हैं कि श्री गिरिधल लाल को देख कर वे इतने मंत्रमुग्ध हैं कि वे अपनी दृष्टि को उनसे हटा नहीं पा रहे । [3]

