प्रेम भक्तिवर देहु दयानिधि, रखो चरण लारे।
सरस माधुरी जुगल बसें, चित गलबैंया डारे॥
- श्री सरस माधुरी
हे दयानिधि गुरुदेव! मुझे प्रेमाभक्ति का ऐसा वरदान दीजिए कि आपके चरणों के समीप मेरा वास हो तथा मेरे चित्त में युगल सरकार अनन्य रूप से गलबहियाँ डाले हुए निवास करें।
सरस माधुरी जुगल बसें, चित गलबैंया डारे॥
- श्री सरस माधुरी
हे दयानिधि गुरुदेव! मुझे प्रेमाभक्ति का ऐसा वरदान दीजिए कि आपके चरणों के समीप मेरा वास हो तथा मेरे चित्त में युगल सरकार अनन्य रूप से गलबहियाँ डाले हुए निवास करें।

