मेरे एक राधा नाम आधार।
कोउ देखत निज रूप ब्रह्म पर, निराकार अबिकार ॥ [1]
कोउ कमलापति कोउ गिरिजापति नाम-रूप उर-धार ।
भक्त-कल्पतरु राम-कृष्ण कोउ सेवत अति सत्कार ॥ [2]
हौं जड़ मति, अति मूढ़ हठीलौ, नटखट निपट गँवार ।
राधे-राधे रटौं निरन्तर, मानि सार कौ सार ॥ [3]
- रसिक वाणी
श्री राधा नाम ही मेरे जीवन का आधार है । कुछ लोग निराकार ब्रह्म के चिंतन का अनुसरण करते हैं। [1]
कुछ लोग भगवान विष्णु और भगवान शिव की भक्ति में संलग्न हैं एवं उनके नाम का जप एवं उनके रूप का चिंतन करते हैं । कुछ लोग भगवान राम और भगवान कृष्ण की अति सत्कार के साथ सेवा करते हैं, जो अपने भक्तों के लिए इच्छा-पूर्ति करने वाले वृक्ष के समान हैं । [2]
वैसे तो मैं जड़ मति हूँ, अति मूर्ख, हठी, दुष्ट एवं निपट गँवार व्यक्ति हूँ, परंतु मेरी आराध्या श्री राधा महारानी हैं और मैं उनके नाम को समस्त सार का भी सार मानकर “राधे राधे" ही नित्य रटता हूँ । [3]
कोउ देखत निज रूप ब्रह्म पर, निराकार अबिकार ॥ [1]
कोउ कमलापति कोउ गिरिजापति नाम-रूप उर-धार ।
भक्त-कल्पतरु राम-कृष्ण कोउ सेवत अति सत्कार ॥ [2]
हौं जड़ मति, अति मूढ़ हठीलौ, नटखट निपट गँवार ।
राधे-राधे रटौं निरन्तर, मानि सार कौ सार ॥ [3]
- रसिक वाणी
श्री राधा नाम ही मेरे जीवन का आधार है । कुछ लोग निराकार ब्रह्म के चिंतन का अनुसरण करते हैं। [1]
कुछ लोग भगवान विष्णु और भगवान शिव की भक्ति में संलग्न हैं एवं उनके नाम का जप एवं उनके रूप का चिंतन करते हैं । कुछ लोग भगवान राम और भगवान कृष्ण की अति सत्कार के साथ सेवा करते हैं, जो अपने भक्तों के लिए इच्छा-पूर्ति करने वाले वृक्ष के समान हैं । [2]
वैसे तो मैं जड़ मति हूँ, अति मूर्ख, हठी, दुष्ट एवं निपट गँवार व्यक्ति हूँ, परंतु मेरी आराध्या श्री राधा महारानी हैं और मैं उनके नाम को समस्त सार का भी सार मानकर “राधे राधे" ही नित्य रटता हूँ । [3]

