या छवि ऊपर हौं बलिहारी - श्री कल्याण पुजारी जी, श्री हित कल्याण पुजारी जी की वाणी (73)

या छवि ऊपर हौं बलिहारी - श्री कल्याण पुजारी जी, श्री हित कल्याण पुजारी जी की वाणी (73)

(राग विहागरौ)
या छवि ऊपर हौं बलिहारी ।
अंशनि बाहु दियैं दोऊ शोभित, नंदनंदन वृषभानुदुलारी ॥ [1]
रसिकराई अति चतुर शिरोमणि, विलसत वृन्दाविपिन-बिहारी ।
कुंज-केलि कल हंस-हंसिनी, 'हित कल्यान' मिले पिय-प्यारी ॥ [2]

- श्री कल्याण पुजारी जी, श्री हित कल्याण पुजारी जी की वाणी (73)

मैं दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण की उस छवि पर बलिहार जाता हूँ जब वे दोनों एक दूसरे का आलिंगन कर गले में हाथ डाले सुशोभित होते हैं । [1]

वे दोनों रसिकशेखर, चतुर शिरोमणि हैं एवं वृंदाविपिन में नित्य विहार रस परायण हैं जो कुंज केली के राज हंस हंसिनी हैं जिनको प्राप्त कर श्री हित कल्याण दास अभिभूत हैं । [2]