(राग मल्हार)
विहरत बाग झूलन के काजे ।
गावत गीत मधुर सुर दोऊ, बीच बीच मुरली धुनि बाजें ॥ [1]
ठुमकि चलन बोलन अवलोकन, कोटि मदन छबि निरखत लाजें ।
नारायण हुलसत सुख बिलसत, लता भवन तरें आय बिराजें ॥ [2]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, वन झूलन लीला (8)
दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण कुंजों में झूला झूलने के लिए विहरण कर रहे हैं । दोनों मधुर स्वर में गीत गान कर रहे हैं, एवं बीच बीच में मुरली बजा रहे हैं । [1]
दोनों का ठुमक ठुमक कर चलना, आपस में बोलना एवं एक दूसरे की ओर निहारना आदि की शोभा को देख कर कोटि कोटि कामदेव भी लज्जित हो रहे हैं । श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं कि वे दोनों परम उल्लसित होकर सुख विलसते हुए लता भवन के नीचे आकर विराजित हो गये । [2]
विहरत बाग झूलन के काजे ।
गावत गीत मधुर सुर दोऊ, बीच बीच मुरली धुनि बाजें ॥ [1]
ठुमकि चलन बोलन अवलोकन, कोटि मदन छबि निरखत लाजें ।
नारायण हुलसत सुख बिलसत, लता भवन तरें आय बिराजें ॥ [2]
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, वन झूलन लीला (8)
दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण कुंजों में झूला झूलने के लिए विहरण कर रहे हैं । दोनों मधुर स्वर में गीत गान कर रहे हैं, एवं बीच बीच में मुरली बजा रहे हैं । [1]
दोनों का ठुमक ठुमक कर चलना, आपस में बोलना एवं एक दूसरे की ओर निहारना आदि की शोभा को देख कर कोटि कोटि कामदेव भी लज्जित हो रहे हैं । श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं कि वे दोनों परम उल्लसित होकर सुख विलसते हुए लता भवन के नीचे आकर विराजित हो गये । [2]

