मंजीर मंडित चरण पंकज  - श्री वंशी अलि, श्री ललिता मंगल (5)

मंजीर मंडित चरण पंकज - श्री वंशी अलि, श्री ललिता मंगल (5)

मंजीर मंडित चरण पंकज चंद्र नष जगमगि रहै। [1]
राधा कृपा हित नंद-नंदन भक्त भावित नित गहै॥ [2]
जा रेणु वर कन पवन सौं नित कोटि विष्णु भव तलं। [3]
नारदेश शुकादि दुर्गम महा दीरघ तत्फलं॥ [4]

- श्री वंशी अलि, श्री ललिता मंगल (5)

श्री ललिता जी के दिव्य चरण कमलों में नूपुर अलंकृत हैं एवं उनके नख (नाखून) की कांति चन्द्र के समान उज्जवल है। [1]

श्री राधा की कृपा प्राप्त करने के लिए ही श्री कृष्ण भक्त भावित होकर श्री ललिता जी के चरणों का नित्य आश्रय लेते हैं। [2]

श्री ललिता जी की पदरेणु के कणों के पवन में उड़ने से कोटि कोटि विष्णु उत्पन्न हो जाते हैं। [3]

उनकी चरण रेणु नारद, शिव और शुकादि के लिए भी दुर्गम है। [4]