यथा च चन्द्रिका चंद्रे प्रभा भानौ हुताशने ।
यथा मधुरिमा नीरे स्पर्शनं मारुते यथा ॥
गन्धः पृथिव्यामनघो राधिकेयं तथाहरौ ।
- वृहद् ब्रह्म संहिता (नारद पंचरात्र के अन्तर्गत)
जैसे चन्द्रमा को चाँदनी, सूर्य को किरण, जल को मधुरिमा, वायु को स्पर्श तथा पृथ्वी को गन्ध छोड़कर नहीं रह सकती है उसी प्रकार श्री कृष्ण एवं श्री राधा एक दूसरे को छोड़ कर नहीं रह सकते ।
यथा मधुरिमा नीरे स्पर्शनं मारुते यथा ॥
गन्धः पृथिव्यामनघो राधिकेयं तथाहरौ ।
- वृहद् ब्रह्म संहिता (नारद पंचरात्र के अन्तर्गत)
जैसे चन्द्रमा को चाँदनी, सूर्य को किरण, जल को मधुरिमा, वायु को स्पर्श तथा पृथ्वी को गन्ध छोड़कर नहीं रह सकती है उसी प्रकार श्री कृष्ण एवं श्री राधा एक दूसरे को छोड़ कर नहीं रह सकते ।

