मैं वारी रस-सागर राधा-नाम ।
पशु-पंछी नर-नारि जपत, राधा-राधा श्रीवृन्दावन धाम ॥ [1]
रोम-रोम पिय के हिय-जिय जो, तन-मन में अभिराम।
हित गुलाब ‘परमानँंद’ जीवन, राधा साधा पूरन काम ॥ [2]
- श्री हित परमानंद दास जी
मैं रस के सागर श्री राधा नाम पर बलिहारी जाता हूँ । श्री वृंदावन धाम के समस्त पशु पक्षी, नर नारी कुछ और नहीं बल्कि केवल राधा राधा नाम ही जपते हैं । [1]
श्री श्यामसुन्दर के रोम रोम में, संपूर्ण ह्रदय में, तन मन में यह मनमोहक राधा नाम ही बसा हुआ है । श्री परमानंद दास जी कहते हैं कि उनका जीवन धन यह राधा नाम है जिसको जपने से श्री राधा रानी समस्त ह्रदय की अभिलाषाएँ स्वतः ही पूर्ण करती हैं । [2]
पशु-पंछी नर-नारि जपत, राधा-राधा श्रीवृन्दावन धाम ॥ [1]
रोम-रोम पिय के हिय-जिय जो, तन-मन में अभिराम।
हित गुलाब ‘परमानँंद’ जीवन, राधा साधा पूरन काम ॥ [2]
- श्री हित परमानंद दास जी
मैं रस के सागर श्री राधा नाम पर बलिहारी जाता हूँ । श्री वृंदावन धाम के समस्त पशु पक्षी, नर नारी कुछ और नहीं बल्कि केवल राधा राधा नाम ही जपते हैं । [1]
श्री श्यामसुन्दर के रोम रोम में, संपूर्ण ह्रदय में, तन मन में यह मनमोहक राधा नाम ही बसा हुआ है । श्री परमानंद दास जी कहते हैं कि उनका जीवन धन यह राधा नाम है जिसको जपने से श्री राधा रानी समस्त ह्रदय की अभिलाषाएँ स्वतः ही पूर्ण करती हैं । [2]

