श्यामा प्यारी विनय सुनौ एक मेरी ॥
भटकत फिरी बहुत गहवर वन, थाह न पाई तेरी ।
अब तौ चरण सरन मोहि लींजै, जानि आपनी चेरी ॥ [1]
करुणा सागर नाम तिहारो, सत्य करो मम हेरी ।
अली माधुरी कौ अपनावो, अब न करो कछु देरी ॥ [2]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका (1)
हे श्यामा प्यारी, मेरी एक विनय सुन लीजिये । मैं बरसाना में स्थित आपके निज वन गह्वर वन में बहुत ही भटक रही हूँ, परन्तु आपको मिल नहीं पा रहा। कृपा कर अब मुझे अपनी दासी जान अपनी चरण शरण में लीजिये । [1]
भटकत फिरी बहुत गहवर वन, थाह न पाई तेरी ।
अब तौ चरण सरन मोहि लींजै, जानि आपनी चेरी ॥ [1]
करुणा सागर नाम तिहारो, सत्य करो मम हेरी ।
अली माधुरी कौ अपनावो, अब न करो कछु देरी ॥ [2]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका (1)
हे श्यामा प्यारी, मेरी एक विनय सुन लीजिये । मैं बरसाना में स्थित आपके निज वन गह्वर वन में बहुत ही भटक रही हूँ, परन्तु आपको मिल नहीं पा रहा। कृपा कर अब मुझे अपनी दासी जान अपनी चरण शरण में लीजिये । [1]
हे राधे, आप तो इस संसार में करुणा सागर नाम से विख्यात हैं, कृपा मेरी ओर कृपा दृष्टि डाल अपने इस नाम को सत्य कीजिये । श्री अली माधुरी जी कहती हैं कि अब तो बिना कुछ देरी किये मुझे अपना लीजिये । [2]

