तिहारो परम दयाल सुभाव -  श्री किशोरी अलि

तिहारो परम दयाल सुभाव - श्री किशोरी अलि

तिहारो परम दयाल सुभाव ।
जन के औगुन ओर न देखौ, अति उपज्यो चित्त चाव ॥ [1]
तुम बिन मोसे अधम उधारन, दीसतु नाहिं उपाव ।
बंसी अली की कृपा ‘किसोरी’, परयो जीति कौ दाव ॥ [2]

- श्री किशोरी अलि

हे किशोरीजी, आपका परम दयालुता का स्वभाव है क्योंकि आप जीवों के अवगुणों की ओर देखती ही नहीं हैं । आपके इस स्वभाव के कारण ही मेरे ह्रदय का उत्साह बढ़ चला है (क्योंकि मुझे लगता है मेरा कल्याण आपके द्वार पर निश्चित ही हो जाएगा) । [1]

मुझ पतित को पावन करने वाली आपके समान और कौन ऐसी करुणामयी स्वामिनी होगी? मुझे आपकी ठौर के अतिरिक्त अन्य कोई उपाय दिखता भी नहीं है । श्री किशोरी अलि जी कहते हैं कि श्री वंशी अलि जी की कृपा से जीत का दांव लग गया है । [2]