प्रथम सीस अर्पन करै पाछै करै प्रवेस - ब्रज के दोहे

प्रथम सीस अर्पन करै पाछै करै प्रवेस - ब्रज के दोहे

प्रथम सीस अर्पन करै, पाछै करै प्रवेस।
ऐसे प्रेमी सुजन कौ, है प्रवेश यहि देस॥

- ब्रज के दोहे

दिव्य प्रेम-देश में प्रवेश पाने के लिए प्रेमी को सर्वप्रथम अपना शीश अर्पित करना होता है, अर्थात् आत्मसमर्पण करना पड़ता है; तभी उसे प्रवेश मिलता है।