राधेत्येवं च संसिद्धा - ब्रह्मवैवर्तपुराण, खण्डः 4 [श्रीकृष्णजन्मखण्डः]/अध्यायः 17 / छंद 223)

राधेत्येवं च संसिद्धा - ब्रह्मवैवर्तपुराण, खण्डः 4 [श्रीकृष्णजन्मखण्डः]/अध्यायः 17 / छंद 223)

राधेत्येवं च संसिद्धा राकारो दानवाचकः ॥
स्वयं निर्वाणदात्री या सा राधा परिकीर्तिता ॥

- ब्रह्मवैवर्तपुराण, खण्डः 4 [श्रीकृष्णजन्मखण्डः]/अध्यायः 17 / छंद 223

'राधा' नाम यह स्वयं सिद्ध है जिसमें 'रा' कार दान वाचक है। स्वयं निर्वाणदात्री होने से वह 'राधा' कहलाती हैं ।