नाम-वाणी निकट श्याम-श्यामा प्रगट - श्री सेवक जी, सेवक वाणी (4.18)

नाम-वाणी निकट श्याम-श्यामा प्रगट - श्री सेवक जी, सेवक वाणी (4.18)

नाम-वाणी निकट श्याम-श्यामा प्रगट,
रहत निशि-दिन परम प्रीती जानी । [1]
नाम-वाणी सुनत श्याम-श्यामा सुबस,
रसद माधुर्य अति प्रेम दानी ॥ [2]
नाम-वाणी जहाँ श्याम-श्यामा तहाँ,
सुनत गावंत मो मन जु मानी । [3]
बलित शुभ नाम बलि बिशद कीरति जगत,
हौं जु बलि जाऊँ हरिवंश-वाणी ॥ [4]

- श्री सेवक जी, सेवक वाणी (4.18)

(इस छन्द में सेवक जी श्री हरिवंश नाम एवं वाणी का प्रभाव बड़े मार्मिक ढंग से स्पष्ट करते हुये कहते हैं )

श्री हरिवंश नाम और वाणी के निकट श्री श्याम श्यामा, श्री हरिवंश चन्द्र की उनके (श्री श्याम श्यामा के) प्रति अनुपम प्रीति पर रीझकर, सदैव प्रकट रहते हैं । [1]

श्री हरिवंश का नाम और उनकी वाणी माधुर्य-रस एवं विपुल प्रेम के दाता हैं अतः श्री श्याम श्यामा इनको उपासक के मुख से सुनते ही उसके वश में हो जाते हैं । [2]

जहाँ श्री हरिवंश नाम और वाणी का अनुशीलन होता है वहाँ श्री श्यामा श्याम उपस्थित रहते हैं। इसीलिये इन नाम प्राणी का श्रवण एवं गायन मेरे मन को अत्यन्त रुचिकर लगता है । [3]

जिस परम मांगलिक श्री हरिवंश नाम में लिपटी हुई (भरी हुई) विशद कीर्ति जगत में व्याप्त हो रही है उसकी मैं बलिहार जाता हूँ और इसी प्रकार श्री हरिवंश वाणी की भी बलिहार होता हूँ । [4]