धन धन वृन्दावन के गदहा प्यारे ।
माटी ईंट पीठ पे ढावैं सबके बनावैं द्वारे ॥ [1]
गैल घाट में करैं जीवका हौंकत हैं मतवारे ।
अभयराम ये हू बड़भागी रज में रहैं बिचारे ॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (80)
श्री वृंदावन धाम के प्यारे गधे धन्य हैं जो अपनी पीठ पर मिट्टी एवं ईंट को ढोते हैं एवं सब के घरों एवं मंदिरों के निर्माण में सहायता करते हैं । [1]
वे वृंदावन की गलियों एवं घाटों में ही अपनी जीविका करते हैं और मतवारे ढंग से हांकते (पुकारते) हैं । श्री अभयराम कहते हैं कि वृंदावन के गधे भी बड़भागी हैं जो वृन्दावन की रज में पड़े रहते हैं । [2]
माटी ईंट पीठ पे ढावैं सबके बनावैं द्वारे ॥ [1]
गैल घाट में करैं जीवका हौंकत हैं मतवारे ।
अभयराम ये हू बड़भागी रज में रहैं बिचारे ॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (80)
श्री वृंदावन धाम के प्यारे गधे धन्य हैं जो अपनी पीठ पर मिट्टी एवं ईंट को ढोते हैं एवं सब के घरों एवं मंदिरों के निर्माण में सहायता करते हैं । [1]
वे वृंदावन की गलियों एवं घाटों में ही अपनी जीविका करते हैं और मतवारे ढंग से हांकते (पुकारते) हैं । श्री अभयराम कहते हैं कि वृंदावन के गधे भी बड़भागी हैं जो वृन्दावन की रज में पड़े रहते हैं । [2]

