श्री वृंदावन माधुरी मदलों चढ़ी विसाल -  श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (17)

श्री वृंदावन माधुरी मदलों चढ़ी विसाल - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (17)

श्री वृंदावन माधुरी मदलों चढ़ी विसाल ।
तब उंगार गुण रूप छवि राधा मोहनलाल ॥

- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (17)

जब श्री वृंदावन की माधुरी का दिव्य प्रभाव हृदय पर छा जाता है, तब श्री राधा-मोहनलाल के अनुपम गुण, सौंदर्य और छवि का उफान भीतर उमड़ने लगता है।