गौर स्याम सुखदैन हैं, श्री वृंदावन माँझ ।
जे या रस नहिं जानहीं, तिनकी जननी बाँझ ॥
- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (74)
श्री वृंदावन धाम में गौर-श्यामल वर्ण के श्री राधा-कृष्ण अनुपम आनंद की वर्षा करते हैं। जो इस दिव्य प्रेम-रस को नहीं जानते, उनका जीवन निस्सार और व्यर्थ है।
जे या रस नहिं जानहीं, तिनकी जननी बाँझ ॥
- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (74)
श्री वृंदावन धाम में गौर-श्यामल वर्ण के श्री राधा-कृष्ण अनुपम आनंद की वर्षा करते हैं। जो इस दिव्य प्रेम-रस को नहीं जानते, उनका जीवन निस्सार और व्यर्थ है।

