ताही के चरन माहिं मेरो मन बसौ नित्त

ताही के चरन माहिं मेरो मन बसौ नित्त

ताही के चरन माहिं मेरो मन बसौ नित्त,
राधा जाको नाम सब सारन की सार है ॥
- श्री हित किशोरी लाल, राधा सुधा निधि स्तव (25)

वृंदावन की स्वामिनी जो समस्त सारों की सार हैं जिनका नाम राधा है, उनके चरणों में ही मेरा मन नित्य वास करे ।