ललित लड़ैती रैन दिन, लगी रहै यह आस ।
युगल लाल छवि निरखिवौ, श्री वृंदावन वास ॥
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (148)
मेरे हृदय में दिन-रात यही एक अभिलाषा जागृत रहे कि मैं युगल लाल की दिव्य छवि का नित्य दर्शन करता रहूँ और श्री वृंदावन धाम में अखंड वास का सौभाग्य प्राप्त करूँ। यही जीवन की परम साधना और एकमात्र कामना है।
युगल लाल छवि निरखिवौ, श्री वृंदावन वास ॥
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (148)
मेरे हृदय में दिन-रात यही एक अभिलाषा जागृत रहे कि मैं युगल लाल की दिव्य छवि का नित्य दर्शन करता रहूँ और श्री वृंदावन धाम में अखंड वास का सौभाग्य प्राप्त करूँ। यही जीवन की परम साधना और एकमात्र कामना है।

