(राग ललित)
अब तौं दरस दीजिये प्यारे ।
श्रीराधा ब्रजचंद्र विहारी सुंदर रूप उज्यारे ॥ [1]
गौरस्याम माधुरी निसिदिन निरखौं नैंन हमारे ।
किशोरीदास लखि नैंन सिराउं दंपति छवि मतवारे ॥ [2]
- श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)
हे मेरे रूप के उज्जवल, प्यारे श्यामा श्याम! अब तो कृपा कर मुझे दर्शन दीजिए । [1]
ऐसी कृपा हो कि मेरे नयन नित्य निरंतर गौर श्यामल वर्ण की माधुरी की ही पान करते रहें । श्री किशोरीदास जी कहते हैं कि दिव्य दंपति की छवि में मतवारे होकर यह नयन शीतल बने रहें । [2]
अब तौं दरस दीजिये प्यारे ।
श्रीराधा ब्रजचंद्र विहारी सुंदर रूप उज्यारे ॥ [1]
गौरस्याम माधुरी निसिदिन निरखौं नैंन हमारे ।
किशोरीदास लखि नैंन सिराउं दंपति छवि मतवारे ॥ [2]
- श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)
हे मेरे रूप के उज्जवल, प्यारे श्यामा श्याम! अब तो कृपा कर मुझे दर्शन दीजिए । [1]
ऐसी कृपा हो कि मेरे नयन नित्य निरंतर गौर श्यामल वर्ण की माधुरी की ही पान करते रहें । श्री किशोरीदास जी कहते हैं कि दिव्य दंपति की छवि में मतवारे होकर यह नयन शीतल बने रहें । [2]

