दोऊ हाथ उठाई कै, कहत पुकारि-पुकारि।
जो चाहौ अपुनौ भलौ, तौ भजि लेहु मुरारि॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (6)
दोनों हाथ उठाकर मैं पुकार-पुकार कर कहता हूँ— यदि तुम अपना भला चाहते हो, तो मुरारी (श्रीकृष्ण) का भजन करो।
जो चाहौ अपुनौ भलौ, तौ भजि लेहु मुरारि॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (6)
दोनों हाथ उठाकर मैं पुकार-पुकार कर कहता हूँ— यदि तुम अपना भला चाहते हो, तो मुरारी (श्रीकृष्ण) का भजन करो।

