पावन वृन्दा विपिन की महिमा कही न जाय - रसिक वाणी

पावन वृन्दा विपिन की महिमा कही न जाय - रसिक वाणी

पावन वृन्दा विपिन की, महिमा कही न जाय।
जाकी रज पावन परसि, पापी जन तरि जाय॥ [1]
पापी जन तरि जाय, नेकहू कष्ट न पावे।
राधेश्याम सुनाम रटि, धाम श्रीहरि कौ पावे॥ [2]
सन्त सकल संसार में, वृन्दावन मन भावन।
साधु-संग सतसंग सों, बने अपावन पावन॥ [3]

- रसिक वाणी

पावन श्री धाम वृंदावन की महिमा का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। इस भूमि की पवित्र रज के स्पर्श से पापी जनों का भी उद्धार हो जाता है। [1]

पापात्माओं का उद्धार हो जाता है और फिर उन्हें किसी प्रकार का कष्ट नहीं मिलता। जो लोग नित्य "राधे श्याम" का जप करते हैं, उन्हें श्री हरि के दिव्य धाम में वास प्राप्त होता है। [2]

समस्त विश्व के संतों के मन में वृंदावन का विशेष स्थान है। संतों की संगति से पापी भी शुद्ध हो जाते हैं। [3]