फलभूमिर्व्रजभूमिर्दत्ता तस्मै पुरैव सरहस्यम् ।
फलमिह तिरोहितं सत्तदिहेदानीं स उद्धवोऽलक्ष्यः ॥
- स्कन्दपुराण, वैष्णवखण्डः (2), भागवतमाहात्म्यम् (6), अध्यायः (2), छंद (23) [2.6.2.23]
ब्रज की भूमि फल भूमि (अर्थात् साधना का फल) है जो पूर्व काल में उद्धव जी को प्राप्त हुई थी । जिस प्रकार यहाँ फल छुपे हुए हैं उसी प्रकार उद्धव जी भी यहाँ अदृश्य रहते हैं ।
फलमिह तिरोहितं सत्तदिहेदानीं स उद्धवोऽलक्ष्यः ॥
- स्कन्दपुराण, वैष्णवखण्डः (2), भागवतमाहात्म्यम् (6), अध्यायः (2), छंद (23) [2.6.2.23]
ब्रज की भूमि फल भूमि (अर्थात् साधना का फल) है जो पूर्व काल में उद्धव जी को प्राप्त हुई थी । जिस प्रकार यहाँ फल छुपे हुए हैं उसी प्रकार उद्धव जी भी यहाँ अदृश्य रहते हैं ।

