प्रगट महल वृंदाविपिन, महली श्यामा श्याम ।
नर नारी सब टहलनी, सेवत आठों याम ॥
- श्री लाड़लीदास, सुधर्म बोधिनी (1.92)
साधक को यह अटूट भाव हृदय में धारण करना चाहिए कि यह वृंदावन ही श्रीश्यामा-श्याम का साक्षात निकुंज-महल है, जहाँ के समस्त नर-नारी उनकी अष्टयाम सेवा में निरंतर रत रहने वाले सेवक हैं।
नर नारी सब टहलनी, सेवत आठों याम ॥
- श्री लाड़लीदास, सुधर्म बोधिनी (1.92)
साधक को यह अटूट भाव हृदय में धारण करना चाहिए कि यह वृंदावन ही श्रीश्यामा-श्याम का साक्षात निकुंज-महल है, जहाँ के समस्त नर-नारी उनकी अष्टयाम सेवा में निरंतर रत रहने वाले सेवक हैं।

