श्यामा प्यारी लाड़िली, जानत सब कौ भाव ।
मेरे तो तुम एक हो, और न कोउ उपाव ॥
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (7)
हे श्यामा प्यारी (श्री राधा)! आप समस्त जनों के ह्रदय के भावों को जानती हैं। मेरा तो आपके अतिरिक्त अन्य कोई आश्रय नहीं है। आपकी अहैतुकी कृपा के बिना कल्याण का कोई दूसरा मार्ग मुझे दृष्टिगोचर नहीं होता।
मेरे तो तुम एक हो, और न कोउ उपाव ॥
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (7)
हे श्यामा प्यारी (श्री राधा)! आप समस्त जनों के ह्रदय के भावों को जानती हैं। मेरा तो आपके अतिरिक्त अन्य कोई आश्रय नहीं है। आपकी अहैतुकी कृपा के बिना कल्याण का कोई दूसरा मार्ग मुझे दृष्टिगोचर नहीं होता।

