निठुराई मत कीजिए, नाहीं तौ प्रण जाय ।
दया-समुद्र कृपायतन करुणासींव कहाय ॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (14)
हे प्रभु, मुझ पर कृपा करने की बारी आई तो आप अब निष्ठुरता मत कीजिए, अन्यथा आपकी 'दया-समुद्र', 'कृपानिधान', 'करुणा की सीमा' आदि बड़ी-बड़ी उपाधियों पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।
दया-समुद्र कृपायतन करुणासींव कहाय ॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (14)
हे प्रभु, मुझ पर कृपा करने की बारी आई तो आप अब निष्ठुरता मत कीजिए, अन्यथा आपकी 'दया-समुद्र', 'कृपानिधान', 'करुणा की सीमा' आदि बड़ी-बड़ी उपाधियों पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।

