नहिं प्रवसत जा विपिन में, बिनु आज्ञा वृजराज।
गवन करै किमि जम अधम, राधा जू के राज॥
- ब्रज के दोहे
जिस श्रीवृंदावन में श्रीराधा महारानी का अखंड साम्राज्य है और जहाँ स्वयं ब्रजराज श्रीकृष्ण भी उनकी आज्ञा के बिना प्रवेश नहीं करते, तो फिर यमराज आदि की तो वहाँ गति ही कहाँ है?
गवन करै किमि जम अधम, राधा जू के राज॥
- ब्रज के दोहे
जिस श्रीवृंदावन में श्रीराधा महारानी का अखंड साम्राज्य है और जहाँ स्वयं ब्रजराज श्रीकृष्ण भी उनकी आज्ञा के बिना प्रवेश नहीं करते, तो फिर यमराज आदि की तो वहाँ गति ही कहाँ है?

