कृता युग्मेन सा केलि महानन्द मयी ध्रुवा ।
नूपुराञ्जनितो रावः स एव ब्रह्म संज्ञिकः ॥
ततो जातस्तु पुरुषः सु शुद्धः प्रकृते परः ।
ततो प्रकृति पुरुषौ ततो नारायणः परः ॥
तन्नाभि कमलाज्जातो ब्रह्मा ब्रह्म विदां वरः ।
ततोरुद्राश्च मुनयो जाता वैसृष्टि कृत्तमाः ॥
- सनत्कुमार संहिता (31.74 - 31.76)
श्रीराधा कृष्ण ने परस्पर मिलकर जब आनन्दमयी सुरति केलि की, उस समय श्री राधा के नूपुर का जो शब्द हुआ उसी को शब्द ब्रह्म कहते हैं । उसी शब्द से मायातीत 'पुरुष' प्रकट हुआ जिससे प्रकृति तथा पुरुष (मायान्तर्यामी) आविर्भाव हुए। जिनसे श्रीनारायण प्रकट हुए। इनकी नाभि कमल से वेद वेत्ताओं में श्रेष्ठ श्री ब्रह्माजी प्रकट हुए । उनसे श्रीमहादेव जी तथा अन्य प्रजापति प्रकट हुए ।
नूपुराञ्जनितो रावः स एव ब्रह्म संज्ञिकः ॥
ततो जातस्तु पुरुषः सु शुद्धः प्रकृते परः ।
ततो प्रकृति पुरुषौ ततो नारायणः परः ॥
तन्नाभि कमलाज्जातो ब्रह्मा ब्रह्म विदां वरः ।
ततोरुद्राश्च मुनयो जाता वैसृष्टि कृत्तमाः ॥
- सनत्कुमार संहिता (31.74 - 31.76)
श्रीराधा कृष्ण ने परस्पर मिलकर जब आनन्दमयी सुरति केलि की, उस समय श्री राधा के नूपुर का जो शब्द हुआ उसी को शब्द ब्रह्म कहते हैं । उसी शब्द से मायातीत 'पुरुष' प्रकट हुआ जिससे प्रकृति तथा पुरुष (मायान्तर्यामी) आविर्भाव हुए। जिनसे श्रीनारायण प्रकट हुए। इनकी नाभि कमल से वेद वेत्ताओं में श्रेष्ठ श्री ब्रह्माजी प्रकट हुए । उनसे श्रीमहादेव जी तथा अन्य प्रजापति प्रकट हुए ।

