मन में तो आनंद है, तनु बौरा सबअंग ।
ना काहू के संग है, सहजो ना कोई संग ॥
- सहजो बाई
सहजोबाई कहती हैं कि जब भगवत्प्रेम से मन अभिभूत हो जाता है तब मन में आनंद छा जाने पर शरीर के सब अंग भाव मग्न हो जाते हैं। उस दशा में न तो किसी के संग की आवश्यकता होती है और न कोई संगी-साथी रह जाता है।
ना काहू के संग है, सहजो ना कोई संग ॥
- सहजो बाई
सहजोबाई कहती हैं कि जब भगवत्प्रेम से मन अभिभूत हो जाता है तब मन में आनंद छा जाने पर शरीर के सब अंग भाव मग्न हो जाते हैं। उस दशा में न तो किसी के संग की आवश्यकता होती है और न कोई संगी-साथी रह जाता है।

